ग’रुड़ पु’राण में बताया की क्या होता है हमारी आ;त्मा के साथ


मृत्यु एक ऐसा सच है जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता। हर इंसान को इन सब बातो के बारे में जानने की जिज्ञासा रहती है कि आखिर क्या होता है मृत्यु के बाद ? क्या होता है उनकी आत्मा के साथ ? किस प्रकार जाती है उनकी आत्मा यमलोक ? क्या होता है मृत्यु से पहले का आभास ? हर कोई जानना चाहता है इन सभी प्रश्नों का उत्तर, तो आज हम आपको बतायेगे इस सवालों का जबाब जिनका वर्णन गरुड़ पुराण में विस्तृत रूप से किया गया है। तो चलिए जानते है !

गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है तो वह व्यक्ति बेसुध हो जाता है उसकी सारी इन्द्रियां शिथिल पड़ जाती है ! उसकी आवाज चली जाती है और उसे एक दिव्य दृष्टी मिलती है जिससे उसके पुरे जीवन की झलक उसके सामने आने लगती है ! उसके बाद 2 यम दूत उसके पास आते है जो देखने में काफी डरावने होते है ! उस व्यक्ति की आत्मा को उसके गले में रस्सी बाँध कर अपने साथ लेकर जाने लगे है यमलोक तक जाने वाला रास्ता काफी भयंकर होता है जहाँ आत्मा को काफी परेशानियों से होकर जाना पड़ता है !

यमलोक पहुचने पर, धर्मराज की आज्ञा के अनुसार उस आत्मा को आकाश मार्ग से 13 दिन के लिए उसके घर छोड़ दिया जाता है घर आने के बाद आत्मा अपने शरीर में फिर से घुसने की कोशिश करती है लेकिन  यमराज के बंधन में बांध कर ऐसा नहीं कर पाती और जब तक उसका पिंड दान नहीं होता तब तक आत्मा भूखी प्यासी रहती है ! फिर 10बे दी  किये पिंडदान से उस आत्मा को चलने की शक्ति मिलती है उसके बाद 13 वे दिन फिर से यमदूत उसे पकड़ लेते है और यमलोक की यात्रा के लिए उसको तीन तरह के रास्ते मिलते है !

एक होता है अर्ची मार्ग जो देवलोक की यात्रा के लिए होता है ! दूसरा होता है धूम मार्ग जो पितृ लोक की यात्रा के लिए होता है और तीसरा होता है उत्पति-विनाश मार्ग जो नरक की यार्ता के लिए होता है ! यह मार्ग काफी भयंकर होता है इसमें आत्मा आग से भरी नदी को पार करना पड़ता है जिसे वह अनेक कष्ट झेलते हुए 47 दिनों तक पार करता है ! फिर यमलोक पहुचने पर चित्र गुप्त उसके कर्मो का लेखा झोखा धर्मराज के सामने रखते है जिसके आधार पर निश्चित किया जाता है की पापी आत्मा को किस नरक में भेजा जाये ! क्यूंकि यमलोक में 36 प्रकार के नरक होते है !

वहीँ जो आत्माए पुन्य करती है, सदैव धर्म के रास्ते पर चलती है उनको स्वर्ग का रास्ता मिलता है जहाँ उसे हर प्रकार का सुख मिलता है उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है उसे जन्म और मृत्यु के बंधन से छुटकारा मिल जाता है !


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